मेरे मन ने भी एकान्त अवसरो में विचार कर अपने भावसुमनो सें भगवान की जो अर्चना की है उन्हीं का संग्रह ईशाराधन है । जीवन में प्रार्थना का बहुत बड़ा महत्व है जिससे दुखी और भटके मन को शान्ति और सुख मिलता है । इसीलिए हमारेयहाँ अनेकों शक्तियों और उनके प्रतीकों के रूप मे विभिन्न देवी - देवताओं की मान्यता हैऔर उन्हे पूजा जाता है । उनसे दुख निवारण और कल्याण प्रदाय हेतु प्रार्थनायें की जाती हैं और जीवन में मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति हेतु उनका ध्यान किया जाता है। ऐसी ही ईश्वर के विभिन्न स्वरूपों की प़ार्थनायें यहाँ संकलित है। हाँ विशेषता एक यह है कि सामान्यतः प़चलित प़ार्थनाओं में व्यक्तिगत भावों , हितों और कामनाओं की अभिव्यक्ति अधिक मिलती है किन्तु इन प़ार्थनाओं में व्यक्तिगत हित की अपेक्षा समाजहित और विश्वहित की कामानायें मुख्य हैं और ईश्वर से सारी मानवजाति के कल्याण हेतु सदभाव और सहिष्णुता के विकास और उदार भावों का दान देने की प़ार्थना की गई है . जो आज के विश्व की एक महती आवश्यकता है। भारत की संस्कति मानवतावादी , सहिष्णु , उदार और परहित कारी रही है । और सदा "विश्व एक नीडम्" का उब्दोधन कर उदाक्त चरिञ की परमावश्यकता प़तिपादित करती है । आशा है कि भगवान के दर्शन सभी प़ार्थनाओं में होगें जो जन मन को शान्ति , शील और समन्वय व आत्मौपम्य की भावना की और अग्रेषित कर सकने में समर्थ होगी । आज के मनोविकारी युग में इसी विचारधारा और सामूहिक प़ार्थना की आवश्यकता प़तीत होती है । भगवान् से - है यही प़ार्थना विश्व सुखमय बने । प़ो . चिञभूषण क्षीवास्तव 'विदग्ध'
| पोर्टल निर्माता | vivek ranjan shrivastava |
| अंतिम बार संशोधित | 28 सितंबर, 2008 9:32:39 AM IST |