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पुनीत पर्व- 15 अगस्त......सी बी श्रीवास्तव

पुनीत पर्व- 15 अगस्त
प्रो चित्रभूषण श्रीवास्तव `विदग्ध´


पंद्रह अगस्त अति पुनीत पर्व है प्यारा
आजाद हुआ था इसी दिन देश हमारा ।

फहरा था तिरंगा इसी दिन आसमान में
सूरज ने नई रोशनी दी थी विहान में।
मन को मिली खुशी थी, औं ऑंखों को एक चमक
सबकी जुबां पे था चढ़ा- ``जै हिन्द´´ का नारा ।।

आजाद
हुआ देष, ये आजाद रहेगा।
सदियों रहा बरबाद अब आबाद रहेगा।
आई बहार कैसे ये इस अपने चमन में
एक लंबी कहानी है, एक इतिहास है सारा।।

फिर मिल के कसम आज यहॉं साथ में खाये
मेहनत के बल पै देष को मजबूत बनायें।
सपना जो शहीदों का था साकार करें हम
अब चाहता है हमसे ये कर्तव्य हमारा।।

नेहरू

ने, इंदिरा ने जो पौधे थे लगाये
होकर बड़े अब आज वे फलने को हैं आये।
हम इनको सींच, देष को खुषहाल रखें सब
लू की लपट इनको नहीं होती है गवारा।।

जिस देष की धरती ने हमें इतना दिया है
उसके लिये अब तक भला हमनें क्या किया है?
हम खुद से ये सवाल करे औं जवाब दें
हमसे ही तो बनता है सदा देष हमारा।।


प्रो चित्रभूषण श्रीवास्तव `विदग्ध´
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