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14 मई, 2008


ब्लॉग्स (2)
जनमन न रहा वैसा , न वैसा है आचरण बदला सभी वातावरण , सारा रहन सहन । भारत तुम्हारे युग का न भारत है अब कहीं हर ओर प्रदूषण की लहर आई कन्हैया आगे पढ़ें...

सदा ध्यान से शुध्दता मन ने पाई यही शुध्दता ही है सच्ची कमाई । सदा ज्योति बन आये भगवान आगे कि निष्पाप मन से गये जब बुलाये आगे पढ़ें...