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मिलती है अनुपम शान्ति परम भगवान तुम्हारे दर्शन में

आत्म निवेदन

मिलती है अनुपम शान्ति परम भगवान तुम्हारे दर्शन में

प्रो सी बी श्रीवास्तव
c-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur ,
Jabalpur (M.P.) 482008

00९४२५४८४४५२
ई मेल vivekranjan.vinamra@gmailcom



मिलती है अनुपम शान्ति परम भगवान तुम्हारे दर्शन में
मन हो उठता उद्विग्न कि जीवनरण के संघर्षण में
जीवन है माया जाल अमर जिसने सबको उलझाया है
है कौन यहां जग मे जिसने मनवांछित सब सुख पाया है
मरूथल मे ज्यों मृग तृष्णावश दिखता लहराता सागर है
वैसे ही पग पग मे फैले अनगिन आकर्षण है
मन और व्यथित होता झू्ठी आसक्ति मे और आकर्षण में

डगमग डगमग होती नैया आये दिन झंझावतो मे
पथ नही सूझता आंखो को गहरी अंधियारी रातो में
उठ जाता सब विशवास कि जब श्रम काम न कोई आता है
जीवन धारा को भरमाने आकर्षण और विकर्षण में
मिल पाई न मन को शान्ति कभी जन धन यश के संर्वधन में

तुम सत् चित् आनंद रूप मधुर संरक्षक पथदर्शक दाता
वह ही कुछ पा सकता है प्रभु जो शरण तुम्हारी आ पाता
बगिया मे फूल बहुत है पर कांटो की पहरेदारी में
सौंदर्यँ शक्ति साधन क्षण के पर स्थायी परिवर्तन है
दिखता है उथलापन ही मन का अनुचित आत्म प्रदर्शन मे







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